
बिहार ग्रामीण आजीविका प्रोत्साहन सोसायटी (BRLPS), जिसे आम भाषा में “जीविका” कहा जाता है, का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण गरीब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है महिला स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups – SHGs), जहाँ महिलाओं को एकजुट कर उनकी आर्थिक व सामाजिक स्थिति मजबूत की जाती है।
सरकार ने यह महसूस किया कि केवल ऋण या वित्तीय सहायता से महिलाओं को आत्मनिर्भर नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए महिलाओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण (Skill Development Training) देना भी बेहद ज़रूरी है। यही कारण है कि 2025 में जीविका ने पूरे बिहार में विभिन्न क्षेत्रों में सैकड़ों प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं, ताकि महिलाएं रोजगार पा सकें या खुद का व्यवसाय चला सकें।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल कौशल सिखाना ही नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मविश्वास देना, समूह में नेतृत्व क्षमता बढ़ाना और स्थानीय बाजार से जोड़ना भी है। इस प्रकार जीविका न केवल महिलाओं को कमाने का अवसर देती है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान भी दिलाती है।
जीविका के अंतर्गत मिलने वाले प्रमुख प्रशिक्षण कार्यक्रम (Major Training Programs Under Jeevika)
बिहार जीविका में महिलाओं को उनकी रुचि, योग्यता और क्षेत्रीय आवश्यकता के अनुसार अनेक प्रकार के प्रशिक्षण दिए जाते हैं। नीचे कुछ प्रमुख कोर्स बताए गए हैं:
1. सिलाई-कढ़ाई और वस्त्र निर्माण प्रशिक्षण
यह सबसे लोकप्रिय और लाभकारी प्रशिक्षणों में से एक है। गाँवों की महिलाएं समूह बनाकर सिलाई मशीनों पर काम करती हैं। प्रशिक्षण में माप लेना, डिज़ाइन बनाना, कटिंग, स्टिचिंग और मार्केटिंग तक की पूरी जानकारी दी जाती है। कई महिलाएं बाद में अपना बुटीक या कपड़ों का यूनिट खोलती हैं।
2. खाद्य प्रसंस्करण और पैकेजिंग (Food Processing)
इस प्रशिक्षण में महिलाओं को पापड़, अचार, मसाले, बेकरी प्रोडक्ट्स, स्नैक्स आदि बनाने और उन्हें बाजार में बेचने की प्रक्रिया सिखाई जाती है। इसके साथ ही पैकेजिंग और लेबलिंग का भी प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे अपने ब्रांड नाम से उत्पाद बेच सकें।
3. कृषि आधारित प्रशिक्षण (Agri-Based Training)
जीविका महिलाओं को आधुनिक खेती तकनीक, जैविक खाद बनाना, दुग्ध उत्पादन, पोल्ट्री फार्मिंग, बकरी पालन आदि का भी प्रशिक्षण देती है। इससे महिलाएं पारंपरिक कृषि से हटकर आय के नए स्रोत विकसित कर सकती हैं।
4. डिजिटल साक्षरता और ई-सेवा प्रशिक्षण
आज के डिजिटल युग में जीविका महिलाओं को कंप्यूटर और मोबाइल से जुड़े कामों का प्रशिक्षण भी देती है, जैसे कि आधार अपडेट, पैन कार्ड आवेदन, बिल भुगतान, ऑनलाइन फॉर्म भरना आदि। इससे महिलाएं गाँव में ही डिजिटल सेवाएं उपलब्ध करवा कर कमाई कर सकती हैं।
5. सौंदर्य और वेलनेस प्रशिक्षण (Beauty & Wellness)
कुछ ब्लॉकों में ब्यूटी पार्लर चलाने, हेयर स्टाइलिंग, स्किन केयर आदि का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। ये प्रशिक्षण खासकर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के लिए उपयोगी हैं।
प्रशिक्षण केंद्र और पंजीकरण प्रक्रिया (Training Centers and Registration Process)
बिहार जीविका के प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य के हर जिले में चलाए जाते हैं। प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर जीविका का Block Project Implementation Unit (BPIU) होता है जो प्रशिक्षण की देखरेख करता है।
पंजीकरण प्रक्रिया:
- सबसे पहले महिला का किसी SHG (Self Help Group) से जुड़ा होना ज़रूरी है।
- SHG से जुड़ने के बाद महिला अपने समूह की मीटिंग में प्रशिक्षण में भाग लेने की इच्छा जता सकती है।
- समूह की अनुशंसा मिलने पर BPIU को नाम भेजा जाता है।
- BPIU महिला का नाम प्रशिक्षण बैच में शामिल करता है।
- निर्धारित तिथि पर महिला को प्रशिक्षण केंद्र में बुलाया जाता है।
दस्तावेज़:
- आधार कार्ड
- पासपोर्ट साइज फोटो
- बैंक खाता विवरण
- SHG सदस्यता ID
प्रशिक्षण अवधि आम तौर पर 15 दिन से 3 महीने तक की होती है। कुछ कोर्स जैसे डिजिटल साक्षरता या ब्यूटी पार्लर 1-2 सप्ताह में पूर्ण हो जाते हैं, जबकि कृषि आधारित प्रशिक्षण 1-3 महीने तक चल सकते हैं।
प्रशिक्षण से मिलने वाले लाभ (Benefits of Training Under Jeevika)
जीविका के प्रशिक्षण से महिलाओं को केवल कौशल ही नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता की पूरी राह मिलती है। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
- आर्थिक आत्मनिर्भरता: प्रशिक्षण के बाद महिलाएं स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकती हैं या SHG में मिलकर प्रोडक्शन यूनिट चला सकती हैं।
- आय में वृद्धि: प्रशिक्षित महिलाओं की औसत मासिक आय सामान्य महिलाओं से 2–3 गुना अधिक होती है।
- बाजार से जुड़ाव: जीविका प्रशिक्षित महिलाओं को मार्केट लिंकिंग भी कराती है, जिससे वे अपने उत्पाद ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से बेच सकें।
- सामाजिक सशक्तिकरण: प्रशिक्षण से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है, वे पंचायत और समूह मीटिंग में अपनी बात रखने लगती हैं।
- सरकारी योजनाओं का लाभ: प्रशिक्षित महिलाओं को सरकार की विभिन्न योजनाओं (PMEGP, Mudra Loan, Start-up schemes) में प्राथमिकता दी जाती है।
कई महिलाएं प्रशिक्षण के बाद गाँव की दूसरी महिलाओं को भी रोजगार देने लगी हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ी बल्कि पूरे गांव का विकास हुआ।
जीविका प्रशिक्षित महिलाओं की सफलता की कहानियाँ (Success Stories)
बिहार के कई जिलों जैसे गोपालगंज, दरभंगा, भागलपुर, और नवादा में हज़ारों महिलाएं जीविका प्रशिक्षण लेकर आज सफल उद्यमी बन चुकी हैं।
- गोपालगंज की मनीषा देवी ने सिलाई प्रशिक्षण लेकर महिलाओं का एक समूह बनाया और आज हर महीने ₹50,000 से अधिक कमाती हैं।
- दरभंगा की सबीना खातून ने फूड प्रोसेसिंग प्रशिक्षण लेकर अचार-पापड़ यूनिट खोली और गाँव की 12 महिलाओं को रोजगार दिया।
- भागलपुर की सुनीता कुमारी ने डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण के बाद CSC (Common Service Center) खोला और अब गाँव में डिजिटल सेवाएं प्रदान करती हैं।
ये उदाहरण दिखाते हैं कि जीविका केवल प्रशिक्षण नहीं देती, बल्कि महिलाओं का भविष्य संवारती है।
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निष्कर्ष – Bihar Jeevika Training Programs 2025
Bihar Jeevika Training Programs 2025 ग्रामीण महिलाओं को कौशल सिखाकर रोज़गार और आत्मनिर्भरता की नई दिशा दे रहे हैं। विभिन्न कोर्स जैसे सिलाई, फूड प्रोसेसिंग, कृषि, डिजिटल सेवाएं और ब्यूटी पार्लर महिलाओं को उनके ही गाँव में कमाई का अवसर दे रहे हैं।
जो महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलना चाहती हैं, उनके लिए जीविका प्रशिक्षण सबसे मजबूत आधार बन सकता है। आज जरूरत है कि अधिक से अधिक महिलाएं SHG से जुड़ें और इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ उठाएं।


