
2025 की शुरुआत में, भारत सरकार ने 29 पुराने व विविध श्रम कानूनों को मिलाकर चार व्यापक संहिताएं लागू की हैं। Code on Wages, 2019, Industrial Relations Code, 2020, Code on Social Security, 2020 और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020 इन चार “New Labour Codes 2025” के अंतर्गत सम्मिलित हैं।
इस समेकन का उद्देश्य श्रम व्यवस्था को सरल, पारदर्शी व समकालीन बनाना है, ताकि कर्मचारियों तथा नियोक्ताओं दोनों के लिए रोजगार व नियमन की बेहतर व्यवस्था हो सके।
प्रमुख बदलाव मजदूरों, नौजवानों और कामगारों के लिए
- ऑपर्चुनिटी और रोजगार: एक रिपोर्ट के अनुसार, इन नए कोड्स से बेरोजगारी दर में लगभग 1.3% की कमी की संभावना है, जिससे करीब 77 लाख नए रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
- सामाजिक सुरक्षा व कवरेज: अब गिग वर्कर्स, असंगठित क्षेत्र, छोटे मजदूर सभी को सामाजिक सुरक्षा (पेंशन, PF, ग्रैच्युटी, स्वास्थ्य आदि) का दायरा मिल सकता है। इससे श्रमिक सुरक्षा कवरेज 85 % तक पहुँचने की उम्मीद है।
- वेतन संरचना और पारदर्शिता: नए कोड के अनुसार, “बेसिक सैलरी + महंगाई भत्ता + अन्य भत्ते” को न्यूनतम वेतन की आधारशिला माना गया है; इससे मजदूरों को समय पर न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम भुगतान, बोनस आदि तय समय पर मिलने में आसानी होगी।
- नौकरी की सुरक्षा व औपचारिकता: सभी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य हुआ है इससे नौकरी औपचारिक बनेगी, व कच्चे/अनियमित रोजगार से मुक़ाबले में बेहतर संरक्षण मिलेगा।
- उद्योगों व अर्थव्यवस्था को मजबूती: इन सुधारों से औपचारिक श्रमिकों की संख्या बढ़ेगी, घरेलू खपत में वृद्धि होगी, जिससे आर्थिक विकास व उपभोग दोनों में सकारात्मक बदलाव की संभावना है।
किसे मिलेगा लाभ कौन-कौन शामिल New Labour Codes 2025 में
हालाँकि नए कोड्स में व्यापक सुधार हुए हैं, लेकिन कुछ बातें सावधानी मांगती हैं:
- बदलती वेतन संरचना: “बेसिक वेतन + भत्ते” की व्याख्या से कुछ कर्मचारियों की हाथ में मिलने वाली सैलरी (take-home salary) कम हो सकती है, क्योंकि बोनस, HRA, अन्य भत्ते अलग हो सकते हैं।
- कंपनियों पर बोझ: सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, ग्रैच्युटी, ओवरटाइम आदि प्रतिबद्धताओं के कारण नियोक्ता लागत बढ़ा सकते हैं, जिसका असर महंगाई या सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
- अनौपचारिक क्षेत्र से औपचारिक क्षेत्र में संक्रमण: कई असंगठित श्रमिकों को मामले में वैधानिक रूप से औपचारिक करना चुनौती हो सकती है संक्रमण में असमंजस या देरी संभव।
- जागरूकता की कमी: नए संहिताओं, लाभों और अधिकारों के बारे में मजदूरों में जागरूकता जरूरी है अन्यथा लाभ नहीं मिल पाएंगे।
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निष्कर्ष — क्यों New Labour Codes 2025 है ऐतिहासिक
2025 में लागू हुए New Labour Codes 2025 ने भारत के श्रम-नियमों में व्यापक सुधार और समेकन किया है। 29 पुराने व पेचिदा कानूनों के स्थान पर चार स्पष्ट, समेकित संहिताएं — जो न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, नौकरी सुरक्षा व कामकाजी माहौल सहित आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनी हैं।
इस बदलाव से लाखों-करोड़ों कामगार विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र, गिग व प्लेटफार्म वर्कर्स के लिए रोजगार स्थिरता, सामाजिक सुरक्षा और काम में मान-सम्मान सुनिश्चित हुआ है। साथ ही, औपचारिक रोजगार व पॉलिसी की पारदर्शिता से अर्थव्यवस्था, उद्योग व घरेलू उपभोग तीनों सुधार की ओर बढ़ सकते हैं।
हालाँकि कुछ चुनौतियाँ हैं वेतन संरचना में बदलाव, नियोक्ता लागत, जागरूकता की कमी लेकिन यदि लागू सही से हुआ, तो यह सुधार भारत में कामगारों के हक को सशक्त बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।


